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शराबी शिक्षक से शर्मसार हुआ शिक्षा का मंदिर, बच्चों का भविष्य दांव पर, फिर भी शिक्षा विभाग चुप क्यों…?

जीशान अंसारी, बिलासपुर।(खबरो का राजा) :- शिक्षा को देश की रीढ़ कहा जाता है, और शिक्षक को समाज का मार्गदर्शक माना जाता है। लेकिन जब यही शिक्षक अपने कर्तव्यों से विमुख होकर अनुशासन की सीमाओं को लांघ जाए, तो पूरा शिक्षा तंत्र सवालों के घेरे में आ जाता है। ऐसा ही एक मामला बिलासपुर जिले के कोटा विकासखंड के शासकीय प्राथमिक शाला आमामुड़ा (संकुल केंद्र बानाबेल) से सामने आया है, जहाँ पदस्थ एक शिक्षक की हरकतों ने शिक्षा के मंदिर को शर्मसार कर दिया है।

वायरल वीडियो की पुष्टि खबरो का राजा नहीं करता :- 

स्थानीय ग्रामीणों और अभिभावकों का आरोप है कि विद्यालय में पदस्थ शिक्षक आए दिन शराब के नशे में धुत रहते हैं। कई बार तो वह स्कूल आते ही नहीं, और जब आते हैं, तब भी नशे की हालत में पढ़ाने की स्थिति में नहीं होते। बच्चों की शिक्षा प्रभावित हो रही है, लेकिन विभागीय अधिकारियों की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।प्रधान पाठक राधेश्याम पोर्ते ने बताया कि शिक्षक रवि शंकर पैकरा की इस हरकत से स्कूल की छवि खराब हो रही है। कई बार शिकायतें उच्चाधिकारियों तक पहुँचाई गईं, परंतु कार्रवाई के नाम पर सिर्फ औपचारिक जांच का आश्वासन मिला। इससे बच्चों के अभिभावकों में गहरा आक्रोश व्याप्त है। अभिभावक कहते हैं कि सरकार बच्चों के भविष्य के लिए करोड़ों रुपए खर्च कर रही है, लेकिन ऐसे लापरवाह शिक्षक इस पूरी व्यवस्था को कलंकित कर रहे हैं।शिक्षा विभाग के अधिकारी जब इस विषय पर सवाल किए गए, तो उन्होंने कहा कि मामले की जानकारी मिली है और जल्द जांच कर कार्रवाई की जाएगी। हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि यह जवाब वे कई महीनों से सुन रहे हैं, लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है।यह स्थिति न केवल एक शिक्षक की व्यक्तिगत लापरवाही का उदाहरण है, बल्कि शिक्षा तंत्र में व्याप्त शिथिलता और जिम्मेदारी की कमी को भी उजागर करती है। एक ओर सरकार गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर जोर दे रही है, वहीं दूसरी ओर जमीनी स्तर पर इस तरह की घटनाएँ व्यवस्था पर गहरा प्रश्नचिह्न लगा रही हैं।

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